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आवृतबीजी पादपों की आकारिकी एवं शारीरिकी

आवृतबीजी पादपों की आकारिकी एवं शारीरिकी पादप आकारिकी:- – पौधों के विभिन्न भागों (जड़, तना, पत्ती, फल, फूल आदि) की बाह्य संरचना का अध्ययन पादप आकारिकी में करते हैं। […]
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प्रजनन प्रणाली

प्रजनन प्रणाली –  जीवों में सन्तान उत्पन्न करने की प्रक्रिया को जनन कहते हैं। मनुष्य […]
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जंतुओं में पोषण

जंतुओं में पोषण पोषण– जीवों में पोषक पदार्थों को प्राप्त करना ही पोषण कहलाता है। पोषण जीवों को ऊर्जा प्रदान करने, शारीरिक वृद्धि एवं विकास में, रोगों से सुरक्षा में, शारीरिक मरम्मत में तथा उपापचयी क्रियाओं में सहायक है। पोषण की विधि के आधार पर जीव दो प्रकार के होते हैं- (1)  स्वपोषी (2)  विषमपोषी स्वपोषी:- – ऐसे जीव, जो अपना भोजन स्वयं ही संश्लेषित करते हैं,जिसे स्वपोषी […]
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अकशेरूकीय

अकशेरूकीय मधुमक्खी (Honey Bee) वर्गीकरण (Classification) à संघ-ऑर्थोपोडा à वर्ग-इंसेक्टा à गण-हाइमेनोप्टेरा à कुल-एपिडी à जाति-एपिस – मधुमक्खियों की चार प्रजातियाँ मिलती हैं– (i) एपिस […]
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जन्तु जगत

– जीव  विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत जीवों का वर्गीकरण व नामकरण का अध्ययन किया […]
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पर्यावरणीय मुद्दे

पर्यावरणीय मुद्दे पर्यावरण प्रदूषण – मानव सभ्यता के विकास के साथ उसकी आवश्यकताओं का भी विस्तार हुआ। तेजी से बढ़ती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों का दोहन शुरू किया। –  औद्योगिक एवं तकनीकी विकास जैसे हथियारों के सहारे मानव ने अपनी स्वार्थी प्रकृति और जनसंख्या के दबाव में प्रकृति का अनियन्त्रित दोहन किया। –  हर बड़े नगर के साथ औद्योगिक क्षेत्र का विकास हुआ और इन उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों के बढ़ने से पर्यावरणीय प्रदूषण नामक समस्या का जन्म हुआ। प्रदूषण का अर्थ एवं परिभाषा – “वायु, जल एवं मृदा के भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणों में होने वाला ऐसा अवांछित परिवर्तन जो मनुष्य के साथ ही सम्पूर्ण परिवेश के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक तत्त्वों को हानि पहुँचाता है, प्रदूषण कहलाता है।”  प्रदूषक-वे […]