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राजस्थान के महल

जयपुर आमेर का महल ●       आमेर की मावठा झील के पास की पहाड़ी पर स्थित महल, जिसे कच्छवाहा नरेश मानसिंह प्रथम द्वारा 1592  ई. में बनाया गया था। ●       यह महल हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य शैली का समन्वित रूप है। ●       महल के मुख्य प्रवेश द्वार में प्रवेश करते ही राजपूत-मुगल शैली पर बना ‘दीवान-ए-आम’ है जो चारों ओर से लाल पत्थरों के खम्भों की दोहरी पंक्तियों से युक्त बरामदों से घिरा हैं। ●       इस विशाल द्वार को फर्ग्यूसन ने संसार का सर्वोत्कृष्ट प्रवेश द्वार बताया है। शीशमहल ● निर्माता – मिर्जा राजा जयसिंह। ● अन्य नाम – ‘दीवाने खास’, ‘जयमन्दिर’। ● यह भीतरी दीवारों पर शीशे की जड़ाई के सुन्दर व बारीक काम के कारण यह ‘शीशमहल’ के नाम से प्रसिद्ध है। ● यह भवन दो मंजिला है भूतल पर बना जयमंदिर कहलाता है तथा प्रथम मंजिल पर बने भवन को जसमंदिर कहा जाता है। […]
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संत एवं सम्प्रदाय

संत एवं सम्प्रदाय ● राजस्थान का जनजीवन अनेक धार्मिक मान्यताओं और आस्थाओं में गूँथा हुआ है। राजस्थान की भौगोलिक परिस्थतियों, मध्यकालीन राजनीतिक संक्रमण, इस्लाम के प्रवेश एवं तुर्क आक्रमणों, उत्तर भारत के भक्ति आन्दोलन आदि ने राजस्थान के जनमानस को भी उद्वेलित किया। ● हिन्दू धर्म, राजस्थान प्रदेश का मुख्य धर्म है। हिन्दू धर्म के अंतर्गत ‘विष्णु पूजक’ अर्थात् वैष्णव धर्म में आस्था रखने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक है। वैष्णवों के अतिरिक्त शैव एवं शाक्त मतावलम्बी भी प्रदेश में न्यूनाधिक संख्या में निवास करते हैं। वैष्णव, शैव एवं शाक्त तीनों ही मत अनेक पंथों एवं सम्प्रदायों में बँटे हुए हैं। ● वैष्णव एवं शैव उपासकों को उपासना पद्धति के आधार पर दो भागों में विभक्त किया जा सकता है-  (1) सगुण संप्रदाय – इसमें ईश्वर को सर्वस्व मानकर ईश्वर के […]